Saturday, August 22, 2009
Badalate hindustan ke pichhe ek hindustan aur bhi hai
आज कल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ,प्रिंट मीडिया सब जगह बड़े बड़े अर्तिक्ले पढ़ने को मिलते है की देश ने आज़ादी के ६२ साल में बहुत प्रगति किया है,दुनिया के अमीर देशो में भारत की गिनती होने लगी है ,अब हम वर्ल्ड बैंक से कर्ज नही लेते,हमारे देश में गरीबी रेखा के निचे रहने वाले लोगो की संख्या अब सिर्फ़ २२ प्रतिशत रह गई है,इन वक्योनो में कितनी सच्चाई है ,क्या सड़क पर दिखानेवाले नेतागन के बड़े बड़े पोस्टर्स यह बयां करते है की हमारा देश विकास कर रहा है,या फिर देश के परेशां किसानो के आत्महत्या की बढाती संख्या ये बयां कराती है,प्रांतवाद अपने चरम सीमा है अब देश में पहले से ज्यादा आतंकवादी हमले होते है ,राजीव गाँधी के बोफोर्स मामले ने क्या सबको इतना डरा दिया है की सच्चाई जानने के बाद भी अब कोई रक्षामंत्री नए लड़ाकू हथियार खरीदने से डरता है और हर साल रक्षा विभाग का आधा पैसा सरकार को वापस कर देता,देश में आम आदमी के मदत के लिए जारि होनेवाला पैसा डेल्ही से दुल्हन की तरह निकलता है और आम आदमी तक पहुँचते पहुँचते कौन लुट लेता है और उसे कभी भी पता नही चल पता तो फिर राईट तो इन्फोर्मेशन सिर्फ़ अमीर और रसूक वाले लोगो के लिए बनाया है ,ये कुछ आम सवाल है जो लगभग भारत का हर आम आदमी जानना चाहता पर बताएगा कौन.
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