Tuesday, September 1, 2009

इंसान के सपने टूटते है तो वो पागल हो जाता है

इंसान के सपने टूटते है तो वो पागल हो जाता है

मेरे दोस्त अमरेन्द्र जो की फेमिना पत्रिका से जुड़े हैं उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा है की अगर इंसान के सपने टूटते है तो वो पागल हो जाता है,हालाँकि की मेरा मानना है की इंसान के जब सपने टूटते हैं तो वोह सिर्फ़ पागल नही होता उसके कई रूप हो सकते है जैसे की कोई आम आदमी जिसमें दुनिया से लड़ने की क्षमता नहीं है उसके हर कोशिश, जिसके दम पर वो अपने सपने को साकार करना चाहता है उसको देखकर लोग उसे पागल कहते है ,और जिनके अन्दर लड़ने का जज्बा होता है वो अपने आखरी दम तक कोशिश करते हैं और उनकी लडाई का स्वरुप अलग होता है, उनके बगावत से समाज में कई तरह की स्थितियां पैदा होती है और उनके हर कदम पर ज़माने को ऐतराज होता है,बल्कि सच्चाई यह की जिस तरह की सुख सुविधा उन्हें होती है उस तरह की सुख की कामना हर इंसान को होती है लेकिन कुछ ऐसे जीते है की उदहारण बन जाते है ओर कुछ ज़माने के लिए घातक नासूर .उदहारण बनना सौ प्रतिशत सही है क्योंकि ऐसे लोग ज़माने को एक नए राह पर ले जाते है पर अगर घातक नासूर बन जाए तो उसे ख़त्म करने के अलावा उसके मन ओर दिमाग में चल रहे बातों का समाधान होना चाहिए ताकि ऐसे इंसान भी समाज के लिए एक उदहारण बन सके ओर उनकी तुलना एक महान आदमी के साथ हो सके.

1 comment: